
त्रयोदशी तिथि पर शुक्र प्रदोष व्रत
शुक्रवार को पड़ने वाले त्रयोदशी तिथि के दिन को शुक्र प्रदोष कहा जाता है। इस दिन महादेव और शुक्र ग्रह की विशेष उपासना की जाती है। शुक्र प्रदोष व्रत के फलस्वरूप सौभाग्य, सम्पन्नता, दीर्घायु और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है। यदि विवाह में देरी हो रही हो, या रोग और आर्थिक समस्याएं सताती हों, तो शुक्र प्रदोष के उपाय आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत की पूजन विधि
- प्रातःकाल की तैयारी:
- सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें।
- हल्के सफेद या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनें।
- दिनभर का व्रत:
- ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का मन ही मन जाप करें।
- निराहार रहें या जलीय आहार का सेवन करें।
- शाम की पूजा:
- प्रदोष काल में भगवान शिव को दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर से स्न्नान कराएं।
- शुद्ध जल से स्नान कराकर रोली, मौली, चावल, और धूप दीप से पूजा करें।
- साबुत चावल की खीर और फल अर्पण करें।
- ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र या पंचाक्षरी स्तोत्र का 5 बार पाठ करें।
महाउपाय
- दांपत्य जीवन की मधुरता:
- लाल गुलाब के 27 फूलों को लाल धागे में पिरोकर पति-पत्नी मिलकर भगवान शिव को अर्पित करें।
- यह उपाय दांपत्य जीवन को सुखमय बनाता है और विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करता है।
- विवाह और रोग से मुक्ति:
- शाम को भगवान शिव को कच्चे दूध से स्न्नान कराएं और गुलाब का इत्र अर्पित करें।
- इस उपाय से विवाह की परेशानियां दूर होती हैं और शुक्र से संबंधित रोगों में राहत मिलती है।
- अन्न-धन का भंडार:
- सफेद चंदन का लेप भगवान शिव पर करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
- यह उपाय घर में धन और अन्न की बरकत के लिए लाभकारी होता है।
शुक्र प्रदोष व्रत की विशेषता यह है कि यह न केवल सौभाग्य और सम्पन्नता का वरदान देता है, बल्कि जीवन के कई प्रमुख क्षेत्रों में शांति और समृद्धि लाने में भी सहायक होता है।
इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि से करें, और अपने जीवन में महादेव की कृपा का अनुभव करें। 🌟